' Chaainsheel | Uttarakhand Tourism Development Board

Chaainsheel

चाँइशील का स्थानीय भाषा में अर्थ है - चाँद के समान शीतल व चाँद के समीप। उत्तराखण्ड राज्य की राजधानी देहरादून से लगभग 230 कि0मी0 की दूरी पर स्थित चाँइशील (जिसे चाँगशील भी कहा जाता है) जनपद उत्तरकाशी के मोरी ब्लाक के बंगाण क्षेत्र की कोठीगाढ़ घाटी एवं हिमाचल प्रदेश के जिला शिमला की तहसील रोहडू एवं डोडराक्वार के मध्य की ऊँची चोटियों की श्रृखला पर स्थित है।

''चाँइशील'' एक अपरिचित पर्यटक स्थल

चाँइशील का स्थानीय भाषा में अर्थ है - चाँद के समान शीतल व चाँद के समीप। उत्तराखण्ड राज्य की राजधानी देहरादून से लगभग 230 कि0मी0 की दूरी पर स्थित चाँइशील (जिसे चाँगशील भी कहा जाता है) जनपद उत्तरकाशी के मोरी ब्लाक के बंगाण क्षेत्र की कोठीगाढ़ घाटी एवं हिमाचल प्रदेश के जिला शिमला की तहसील रोहडू एवं डोडराक्वार के मध्य की ऊँची चोटियों की श्रृखला पर स्थित है। इस श्रृखला में स्थित अधिकतर घास के मैदान (जिन्हे थाच (बुग्याल) कहा जाता है) व रमणीक स्थल उत्तराखण्ड राज्य में स्थित है। हिमाचल प्रदेश राज्य द्वारा उक्त स्थान के लिए मोटर मार्ग निर्मित किया गया है जो चिड़गांव से चाँइशील की सीमा से होते हुए डोडराक्वार (हिमाचल प्रदेश) को जाता है।

चाँइशील घाटी एक अर्धवृत्ताकार पर्वत श्रृखला है जो लगभग 15-20 कि0मी0 समतल व हल्के ढलान युक्त क्षेत्रफल में अवस्थित है। यहां पर छोटी-छोटी घास एवं फूलों की घाटियां एवं बडे़-बड़े मैदान स्थित है तथा जगह-जगह पर जलधाराएं (छोटी नदियां) व वाटरफाल (स्थानीय भाषा में छाड़ कहा जाता है) स्थित है। यहां से बर्फ से ढकी हिमालय की उच्च चोटियां जो अर्धचन्द्राकार रूप में अवस्थित प्रतीत होती है, के भी दर्शन होते है। चाँइशील शिखर पर पहुंच कर ऐसा प्रतीत होता है मानों स्वर्ग के दर्शन हो गये है, प्रकृति ने इस स्थान को कूट-कूट कर सौन्दर्य प्रदान किया है। स्थानीय लोगों से ज्ञात हुआ है कि इस क्षेत्र में आज तक कभी भी प्राकृतिक आपदाएं नहीं आयी है इस क्षेत्र की बनावट के कारण ही प्राकृति आपदाएं नही आती है। मुख्यालय से उक्त क्षेत्र की दूरी अधिक नहीं है।

चाँइशील के आकर्षण- चाँइशील में पूरे वर्ष पर्यटन (मात्र जुलाई एवं अगस्त की मानसून अवधि को छोड़कर) संचालित हो सकता है। जहां मई से अक्टूबर तक प्राकृतिक सुन्दरता के रूप में यहां अवस्थित बुग्याल एवं फूलों की घाटियों में पर्वतीय घास, फूलों एवं जडि़-बूटियों की महक का आनन्द लिया जा सकता है वही शीतऋतु में यहां पर विन्टर गेम्स का आयोजन किया जा सकता है यहां भौगोलिक संरचना के रूप में बड़े-बडे़ बुग्याल (थाच) व लम्बी-लम्बी ढलाने आइस स्कैटिंग, सिकयिंग, स्नो बोर्ड आदि बर्फ के खेलों के लिए विश्व स्तरीय ट्रैक प्रदान कर सकते हैं। औली की तुलना में यहां शीतकालीन खेलो हेतु बड़े स्थान उपलब्ध है।

वैसे तो पुरी चाँइशील घाटी ही रमणीक एवं सम्मोहक है फिर भी जिन स्थानों पर विभिन्न प्रकार के खेलों का आयोजन किया जा सकता है व प्राकृतिक रूप से अति आकर्षक है उनमें से कुछ का विवरण निम्न प्रकार है :-

सुनाइटी थाच (बुग्याल) - यह स्थान मखमली घास की चादर ओड़े हुए है। लगभग 1 वर्ग कि0मी0 में फैला यह थाच (बुग्याल) हल्की ढलान युक्त है जिसके चारों ओर खरसू के वृक्ष अवस्थित है यहां से लगभग 150 मीटर नीचे जलस्रोत भी स्थित है। जहाँ यह स्थान ग्रीष्मकाल में शान्त एवं रमणीक पिकनिक स्पाट हो सकता है वही शीतकाल में यहां पर विन्टर गैम्स हेतु ट्रैक तैयार किये जा सकते है।

बुताहा तप्पड़ - यह भी समान रूप से ढलान युक्त मखमली घास बुग्याल है।

कुबाथाच (बुग्याल) - यहां से हिमालय की बर्फाच्छादित चोटियों के दर्शन होते है। मखमली घास युक्त इस थाच के ढलान में नीचे की ओर बुराँस की सफेद फूल की प्रजाति व भोज पत्र के वृक्ष अवस्थित है।

सामटा थाच (बुग्याल) - यह बहुत ही सुन्दर व काफी बड़े क्षेत्र में फैला लगभग समतल मैदान है। जिसकी छोटी घास व विभिन्न प्रकार के फूल मन को मोह लेते है।

लाम्बीधार व ठोलाशीर - हल्की ढलानयुक्त लगभग 3 कि0मी0 लम्बी धार जहां पर आधुनिक तकनीकों का प्रयोग कर लगभग 10 कि0मी0 लम्बा विश्व स्तरीय स्नो सिकयिंग, स्नो बोर्ड ट्रैक तैयार किया जा सकता है।

संई सुनाई थाच (बुग्याल) - निहायती खूवसूरत बुग्याल जहां पर एक छोर से दूसरे छोड़ पर देखने पर व्यक्ति बहुत छोटा दिखता है। इस बुग्याल की आकृति लगभग अर्ध वृत्ताकार है। यहां पर पत्थर शैलखण्ड के काफी टुकड़े दिखते है जो देखने में काफी चमकीले एवं आकर्षक प्रतीत होते है।

बुड़ीक थाच (बुग्याल) - यह चाँइशील के सबसे सुन्दर स्थलों में से एक है। चाँइशील के शिखर के ऊपर लगभग समतल मैदान जो चारों ओर को फैला है जिसमें पूर्व की ओर हल्की ढलान युक्त लम्बी धार है जहां विश्व का सबसे खूबसूरत लम्बा व चौड़ा स्नो सिकयिंग टै्रक तैयार किया जा सकता है और क्इ तरह के विन्टर गेम्स का आयोजन यहां किया जा सकता है।

कोशमोल्टी धार व थाच - चाँइशील श्रृखला की सबसे ऊँची चोटी व लगभग हल्की ढलानयुक्त धार जिसमें ढलान में नीचे की ओर एक काफी बड़ा बुग्याल है जो बहुत ही खुबसूरत व रमणीय है।

सरूताल - कोश्मोल्टी से उत्तर दिशा की ओर जाने पर ढलान पार कर हल्की समतल धार में लगभग 2 कि0मी0 दूरी पर धार के ऊपर सरूताल नामक झील है जिसमें एक बड़ा व एक छोटा तालाब स्थित है। यह ताल इतनी ऊंची चोटी पर स्थित होने के कारण स्वयं में कौतुहल प्रकट करता है जब इस झील में हिमाच्छादित हिमालय की चोटियों का विम्ब पड़ता है तो यह दृश्य आँखों को शीतलता व सुकून प्रदान करता है। यह झील यधपि हिमाचल प्रदेश की सीमा में स्थित है। किन्तु पर्यटक भौगोलिक सीमाएं नहीं देखता।

धुपालटू थाच (बुग्याल) - हल्की ढलान युक्त खुबसूरत बुग्याल जो आधा उत्तराखण्ड राज्य में व आधा हिमालच प्रदेश में अवस्थित है।

कोटूजानी - यहां पर काफी मात्रा में शैल खण्ड विखरे है। इसकी ढलान हिमाचल प्रदेश राज्य में स्थित है।

टिकूलाथाच(बुग्याल) - बहुत ही विशाल मैदान इसका आकार इतना बड़ा है कि इसमें हवाई पटटी भी तैयार की जा सकती है। यह बुग्याल इतना बड़ा है कि इसको गोल्फ ग्राउण्ड के रूप में विकसित किया जा सकता है। हल्की घास एवं फूलों से युक्त यह थाच (बुग्याल) चाँइशील स्थित सभी बुग्यालों से आकार एवं समतलता की दृष्टि से सबसे विशाल (बुग्याल) है इस बुग्याल के पश्चिम की ओर हल्की लम्बी व खूब सूरत ढलान है। जहां स्नो स्कैयिग टै्रक तैयार किया जा सकता है इस बुग्याल का समस्त समतल मैदान उत्तराखण्ड राज्य में व ढलान का कुछ हिस्सा हिमाचल प्रदेश राज्य में व कुछ हिस्सा उत्तराखण्ड राज्य में अवसिथत है।

फलचीथाच (बुग्याल) - यह ढलान युक्त बुग्याल केलांर्इधार से चाँइशील को जाते हुए प्रथम बुग्याल है तथा यहा से केलांर्इ धार तक रोप वे स्थापित करने के लिए उपयुक्त स्थल है।

सपाहाथाच - यह भी एक खूबसूरत बुग्याल है। यह बुग्याल अपनी हरितिमा एवं विशालता के लिए जाना जाता है। उतरते वक्त यह फलचीथाच से काश्ला मंदिर होते हुए दुचाणू के रास्ते पर बीच में स्थित है टिकोची दुचाणू टै्रक रूट से आते समय यहां पर रात्रि विश्राम किया जा सकता है।

मुरलाछाड़ (झरना) - यह वाटरफाल केलांर्इधार से लगभग 1) कि0मी0 की पैदल (सीधा) रास्ता तय करने पर पड़ता है, जिसकी ऊँचाइ कैम्टीफाल व टाइगरफाल से लगभग तीन गुणा अधिक है। इस झरने की कलकल से व इसके आस-पास बसेरा डाले पंछियों की चहचहाअट से गुंजा संगीत मन को मंत्रमुग्ध कर देता है।

तारामण्डल - यह भोकटाड़ागाड़ में स्थित जलमण्डल है यहा पर पानी इतने तेज वेग से फुवारे के रूप में बहता है और ऊपर हल्का आसमान दिखता है एडवेंचर्स प्रेमियों को यह स्थान अत्यन्त प्रिय लगता है।

भिंऊसिंह ढोल (शैल) - यह शैलखण्ड ग्राम दुचाणू में स्थित है। यह चटटान सेब के बागों के बीच सीधी खड़ी स्थित है, जिसकी ऊंचार्इ काफी अधिक है। यह शैलखण्ड काफी आकर्षक है इसे नीचे से ऊपर देखने पर टोपी गिरजाती है। मान्यता है कि इस शैलखण्ड को भीम द्वारा यहाँ स्थापित किया गया है। इस शैल खण्ड को बंगी जमिपंग के लिए विकसित किया जा सकता है।

इसके अतिरिक्त इस क्षेत्र में अन्य स्थल भी है जिन्हें विकसित किया जा सकता है। धार्मिक पर्यटकों के लिए चार महासू व स्थानीय देवी देवताओं के गांव गांव निर्मित मंदिर व अन्य स्थल भी आकर्षण के केन्द्र हो सकते है। कुछ मुख्य मंदिर एवं अन्य आकर्षक स्थल निम्न है :-

देबवन तीर्थ स्थल - चार महासू में से एक श्री महाशिव पवासी देवता जिसे उत्तरकाशी जिले के बंगाण क्षेत्र व हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के अधिकांश क्षेत्र का कुल देवता कहा जाता है का यह मंदिर देवदार के घने जंगलों के बीच स्थित बुग्याल में है। चार महासू को शिव का अवतार माना जाता है और मान्यता है कि जब चार महासू जम्मू कश्मीर की अमरनाथगुफा से हनोल में आये तो महाशिव पवासी देवता अपने लिए पृथक स्थान की खोज में निकले और देवदार के घने जंगलों में स्थित देववन को उन्होंने अमरनाथ के समान उच्च शिखर पर स्थित पत्रित स्थान मानते हुए अपना तीर्थस्थल चुना। सामान्यत: यहां पर अक्षय तृतीया पर जाने की प्रथा प्रचलन में है। मान्यता है कि यहां पर जो भी व्यक्ति सच्चे मन से अपनी मुराद लेकर जाता है उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है। इसके अतिरिक्त क्षेत्र के सभी गावों में धार्मिक मंदिर स्थित है।

बाल्चा - कोटीगाढ़ में ग्राम गोकुलझोटडी पंचायत में सिथत बाल्चा में किसी समय विश्व का सबसे मोटा देवदार का वृक्ष स्थित था, जिसका तना (स्वह) स्वतंत्रता से पूर्व एफ0आर0आर्इ0 देहरादून में स्थापित किया गया है। यहां पर राजकीय आलू फार्म भी है तथा सुन्दर बुग्याल भी स्थित है।

चाँइशील जाने के मार्ग (Route )-

(1) देहरादून - विकासनगर - मसूरी - नौगाव - पुरोला - मोरी - त्यूनी - आराकोट - टिकोची।

(2) देहरादून - विकासनगर - चकराता - त्यूनी - आराकोट - टिकोची।

उपरोक्त मार्गो से आराकोट से कोठीगाड़ घाटी के टिकोची नामक स्थल पर प्रवेश करने पर निम्न चार मार्गो से चाँइशील पहुँचा जा सकता है :-

  • टिकोची से दुचाणू तक मोटर मार्ग से तथा दुचाणू से 1 कि0मी0 की चड़ार्इ उपरान्त सराधार-कालाधार-चौटटोली-सपाहा होते हुए टिकुलाथाच के रास्ते

  • टिकोची वरनाली माकुड़ीझोटाड़ी बाल्चा देबवन-काउटियाटाप-खर्ली भुश्याली-सुनाउटीथाच की ओर से (सबसे लम्बा)

  • टिकोची-चींवा बलावट मौंडा, धुनपुर काउटिया, सुनाउटीथाच की ओर से

  • टिकोची-चीवां-बलावट केलांर्इधार फलची एवं टिकुलाधार की ओर से (सबसे नजदीक किन्तु चढ़ार्इ अधिक)।

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